ज़िन्दगी मेरी TEACHER : अनुशासन और समर्पण

Hello दोस्तो ! मैं आपका दोस्त निष्कर्ष सिद्धार्थ! कैसे है आप सभी , बेशक अच्छे ही होंगे। पिछले post में हमने जाना के ज़िन्दगी क्या है और ये हमे वक़्त के साथ कुछ सबक देती ही रहती है, इसीलिए हमने इसे हमारा teacher माना है कहने का मतलब ये है की कही ना कही ज़िन्दगी हमे हर समय कुछ न कुछ सिखाती रहती है जो हमारे जीवन को एक नही परिभाषा देती है। ज़रा सोचिए अगर हमारी ज़िन्दगी एक ही तरीके से चलती रही जैसे हमारे हाथो की घड़ी चलती है तो क्या इसे जीने में मज़ा आएगा या फिर कभी ऐसी ज़िन्दगी किसी इंसान के लिए मिसाल के लायक बन सकती है , मुझे नही लगता क्योंकि ये तो एक हँसने वाली बात हो जाएगी, इसका मतलब ये है की जीवन में ‘change’ बहोत ज़रूरी है। लेकिन क्या change इतने जल्दी आता है ? अगर हम खुदको बदलना चाहे तो क्या पलक झपकाते ही बदल सकते है? तो मैं कहूंगा नही! ये तो एक नामुमकिन बात है, और हमे ऐसी कोशिश भी नही करनी चाइये, तो फिर क्या करना चाइये ? हमे सही रास्ता चुनना चाइये क्योंकि इंसान सुखी हो या फिर दुखी , अमीर हो चाहे गरीब उसे ख़ुदको एक वक़्त पर आकर तो बदलना ही पड़ता है, उदहारण के लिए कहा जाए  तो बचपन में हम जो गलती करते  है उसे दुनिया नादानी कहती है, लेकिन अगर वही गलती हम जवानी में करे तो यही दुनिया उसे गलती कहती है, इसलिए जीवन में परिवर्तन कितना ज़रूरी हैं ये तो आप समझ ही गए होंगे और शायद यही कारण है हर इंसान वक़्त के साथ ख़ुदको बदलता है, ख़ुदको सभ्य बनाता है वरना ये दुनिया हमे स्वीकार नही करेगी,जैसे शादी से पहेल इंसान कुछ औऱ होता है और शादी के बाद कुछ और ।वो दोनों परिस्थितियों में समान वयवहार नही रख सकता। ये छोटे उदहारण है सिर्फ़ बताने के लिए परिवर्तन कितना ज़रूरी है और ऐसा ही परिवर्तन तब भी ज़रूरी है जब सफलता हासिल करना हो या तब भी जब ज़िन्दगी में कुछ सही नही चल रहा हो , पर क्या change लाना इतना आसान है? तो मैं कहूंगा नही ! ये इतना आसान नही है चाहे वो किसी भी feild में हो मेरा मतलब है आंतरिक(internal) या फिर बाहरी(external) वैवहार में। मान के चलिये अगर आप किसी GYM में जाते हो तो क्या आपकी body तुरंत बन जाती है , शायद ही कोई होगा ऐसा होगा, लेकिन मेरे खयाल से तो कोई नही होगा। लेकिन अगर आप मन लगाकर पुरे विश्वास  से GYM में मेहनत करोगे तो आपको शायद आपके body में कुछ changes दिखगे और एक दिन आपकी body भी बन जाएगी,लेकिन इसके लिए वक़्त तो लगता है लेकिन क्या आप जानते है ऐसे मेहनत के लिए कौनसी चीज़ों का होना ज़रूरी है ? तो दोस्तो वो है ‘अनुशासन (discipiln)’और’समर्पण (dedication) जो की ज़िन्दगी का सबसे पहला और महत्वपूर्ण सबक है, इसीलिए शायद बच्चो की school सुबह सुबह होती है ताकि वो अनुशासन सिख सके। अनुशासन और समर्पण कहने को तो बहोत आसान लगते है, पर इसे ज़िन्दगी में शामिल करना बहोत मुश्किल होता है, लेकिन एक बार इसे जिसने अपने ज़िन्दगी में शामिल कर लिया सफलता के दरवाज़े उसके लिए खुल जाते है । तो क्या है अनुशासन और समर्पण  आइये जानते है ।
         आज के इस ज़माने में जिसे हम ‘digital world’ भी कहते है,जो की कहने को तो काफी है smart और advance है जो की शायद सच भी है, और ये दुनिया को तरक़्क़ी भी दे रहा है, लेकिन क्या ये सच नही है के ये लोगो को बहोत आलसी भी बना रहा है, हर कोई अपना काम आज घर बैठे ही कर लेता है कुछ महान लोग तो बिस्तर भी नही छोड़ते जो की आलस को बढ़ावा देता है। ना यहाँ किसीको सुबह उठने की परवाह है ना किसीको रात को जल्दी सोने की यहाँ सब लगे है अपने online schedule में। आप ही बताइये ये सही है? मैं कहूंगा ये बिल्कुल सही नही है। मैं ये इसलिए कह सकता हु क्योंकि मैंने इस चीज़ को खुद कही आज़माया है और महसूस किया है। आलस आपके passion को खत्म करता है। लेकिन शुक्र मानिये दोस्तो हमारी teacher ज़िन्दगी ऐसा ज़्यादा दिनों तक सहन नही करती और वो हमे कभी न कभी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहा हमे सब बर्बाद होते हुए दिखता है और तब हम ये सोचते है की ‘ मैन तो अभी शुरवात ही की थी ज़िन्दगी की ‘ और ज़िन्दगी ने मेरे साथ ये क्या कर दिया और हार मानकर बैठ जाते है। लेकिन इसके पीछे क्या कारण हो सकता है ये कोई नही सोचता, तो मैं कहूंगा अनुशासन और समर्पण का ना होना इसका सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि अनुशासन से ही इंसान में passion बढ़ता है और passion को पूरा समर्पण दिया जाए तो उसे असली मेहनत कहते है जो आपको कभी ना कभी कोई ना कोई मुकाम तक ज़रूर लेकर जाती है। ये जिन्दगी का उसूल है कुछ पाना है तो कुछ खोना पड़ेगा ही, कहने का मतलब है अनुशाशन और समर्पण काफी ज़रूरी है सफलता और एक अच्छा result पाने के लिए । जितना आप ज़िन्दागी को दोगे, ज़िन्दगी उतना ही आप पर लुटायेगी, क्योंकि दोस्तो ” ज़िन्दगी हमे वो नही देती जो हम चाहते है, ज़िन्दगी हमे वो देती है जिसके हम लायक होते है।”ये एक सरल formula है {discipline + dedication = success}
            दोस्तो क्या आप जानते है अनुशासन में रहना कितना मुश्किल है? शायद नही ! तो एक बार कोशिश कीजिये समझ जाओगे, अनुशासन से एक बार कोशिश कीजिये सूरज से पहले उठने की चाहे आप कितना ही देर से क्यों ना सोते हो, कोशिश कीजिये मुश्किल रास्तो पर चलने की जबकि आपके पास सरल रास्तो का विकल्प हो,कोशिश कीजिये मजबूत बनने की जहा सब कमज़ोरी बता रहे हो, कोशिश कीजिये 20 कदम चलने की जहा लोग 10 कदम भी न चल पा रहे हो, कोशिश कीजिये आगे बढ़ने की जब आपमे आगे बढ़ने की हिम्मत ख़त्म हो जाए। ये काफी मुश्किल लगता है पर नामुमकिन नही ये सब चीज़े आप तब कर सकते हो जब  आपमे भरपूर अनुशासन हो और समर्पण की भावना हो।आपको पता है सपना हर कोई देखता है उसके लिए कुछ मेहनत भी कर लेता है लेकिन कुछ हार के बाद और जल्द कोई result ना मिला तो वो जल्दी निराश होकर हिम्मत हार जाता है और अपना सपना छोड़ देता है। ऐसा क्यों होता है? क्योंकि सपना जितना वो deserve ही नही करता,क्योंकि जीतना वो deserve करता है जो मेहनत पर विश्वास रखता हो और जिसे त्याग करने की आदत हो,जो अपना सबकुछ समर्पित करने को तैयार रहता हो जो अपने लक्ष्य के लिए रात दिन सोता ना हो वही अपना सपना हासिल कर सकता है और ये सिर्फ अनुशासन और समर्पण ही आपको सीखा सकता है। इन 2 चीज़ों का ना अपनाया तो आप कुछ हासिल नही कर सकते। बड़ी सफलता बड़ी मेहनत और बड़ी struggle का नाम है, आपको आपके ‘comfort zone’ से निकलना ही होगा। एक मशहूर उदहारण देना चाहूंगा – चीन में एक मशहूर tree है जिसे सब ‘chinees bamboo tree’ कहते है जो की मशहूर है अपने growth period( वृद्धी का समय )के लिए क्योंकि इस ट्री को बड़ा होने के लिए 5 साल लगते है, हैना ये एक आश्चर्यजनक बात, लेकिन जब ये 5 साल के बाद बढ़ना शुरू करता ही तो सिर्फ 6 हफ़्तों में ही 90 फुट तक ऊँचा हो जाता है जो एक की एक चौकाने वाली बात है, इसीलिए यह इतना मशहूर ट्री है और सभी इसे देखना पसंद करते है , लेकिन इस ट्री के बारे में लोग यह सोचते और कहते है की यह ट्री सिर्फ 6 हफ़्तों में इतना बड़ा हुआ है, लेकिन कोई यह नही देखता की इसके पीछे 5 साल की मेहनत है उन लोगो की जिन्होंने इस ट्री को 5 साल तक लगातार पूरे अनुशासन और समर्पण से पानी और मिट्टी दीया है, अगर ये लोग ये काम करते हुए ये सोचते की रोज़ हम इस ट्री को बड़ा करने के लिए मेहनत कर रहे है लेकिन इसका कोई परिणाम नही मिल रहा और और अपना काम छोड़ देते तो क्या हमे ये खूबसूरत ट्री कभी देखने को मिलता? नही! ये बेचारा तो ज़मीन में ही मर जाता । ऐसा ही हमारे ज़िन्दगी में भी होता है हम अगर किसी चीज़ की शुरवात करे और उसपर पूरे अनुशासन और समर्पण से मेहनत करे तो हमे हमारी मंज़िल मिल ही जाती है लेकिन बीच में ही वो काम छोड़ दिया जाए तो मंज़िल मिलना नामुमकिन है, और ये समय की बर्बादी भी है लेकिन कुछ लोग इस चीज़ का दोष भी किस्मत को दे देते है। हमे सिर्फ ये सोचना चाइये की हम जो भी काम कर रहे हो वो पूरी ईमानदारी से हो और पूरे अनुशासन से हो क्योंकि कोई भी काम का result तुरंत नही मिलता, आपको भरोसा रखना पड़ेगा, सबर रखना पड़ेगा ,काबिलियत रखनी पड़ेगी क्योंकि , ” अनुशासन आपको शायद मनोरंजन न दे , लेकिन हर बार मुनाफा और तरक़्क़ी ज़रूर देगा। ” सब कहते है की उनकी तरक्की हो लेकिन कोई कीमत नही चुकाना चहाता, इसीलिए बहाना देना बंद कीजिये और क़ीमत चुकाने के लिए तैयार रहिये। आपका दिमाग ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है इसका इस्तेमाल कीजिये और खुदपर भरोसा रखिये,क्योंकि कही ऐसा न हो जाए की आपसे कम काबिलियत वाला इंसान सिर्फ ये 2 चीज़ों का इस्तेमाल करके आपसे आगे निकल जाए और आप बस ज़िन्दगी भर पछताते रह जाओ।

                                                                                             धन्यवाद……….!
अनुशाषित और समर्पित सफल व्यक्ति :
1) अक्षय कुमार
2) अमीर खान
3) अब्दुल कलाम
4) शारुख खान
5) महेंद्रसिंह धोनी
अगर आपको मेरी पोस्ट पसंद आयी हो तो please शेयर कीजिये और कमेंट किजिये और फॉलो करना न भूले मैं आपको ऐसे रोचक बातो वाली पोस्ट देता रहूंगा मैं आपका दोस्त निष्कर्ष सिद्धार्थ ।

12 thoughts on “ज़िन्दगी मेरी TEACHER : अनुशासन और समर्पण

  1. बहोत ही सुंदर आर्टिकल है निष्कर्ष जी। मैं इसे ज़रूर अपने भाषण में उपयोग में लाऊंगा। धन्यवाद!

    • धन्यवाद कुणाल जी आपकी ये प्रशंशा मेरे लिए बहोत मायने रखती है । मैं आशा करता हु इसी तरह के और आर्टिकल मै आप लोगो के लिए लिख सकू। धन्यवाद!

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  3. आपका अनुशाशन आपको बड़ा इंसान बनाता है, ये सोच कितनी महान है। मैं आपकी फैन हु सर ,आपकी सोच की फैन हु। आप ऐसे ही पोस्ट लिखते रहे । लव यू सर।

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